महंगाई पर शायरी - Mehngai par Status, Shayari & Quotes

दोस्तों, आज कल हर कोई बढ़ती महंगाई की वजह से परेशान है। हर साल बहुत तेजी से महंगाई बढ़ती जा रही है। इस लिए आज हम इस पोस्ट में महंगाई पर कुछ शायरी लेकर आये है। जिन्हे आप अपने सोशल मीडिया शेयर कर सकते है। 

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बढ़ती महंगाई पर स्लोगन - Mehangai Shayari & Slogan

महंगाई क्या होती है?

किसी गरीब से पूछो,

किसी बेरोजगार से पूछो,

पढने वाले छात्रों से पूछों,

खेतों में काम करने वाले किसान से पूछों…

 

हवा हुए चटखारे लगाना

मुश्किल हुआ है अच्छा खाना

कैसे खाली पेट भजन गाना

सरकार सुझाओ बहाना

 

महंगाई का है दर्द ऐसा

जनता के मुंह से निकले ना चीख

लगता है मीडिया नेता ने मिलकर

कर दिया टोटका या पहनाया ताबीज

 

कोई चोरी के तरीके सोचे

तो कोई खोज रहा पारस पत्थर

महंगाई ने किया कुछ ऐसे ही विकास

कि बन रहे रोजगार के ऐसे ही अवसर

 

खुशनसीब है सरकारी नौकर

जो है सरकारी दामाद

महंगाई तो सिर्फ अनाथ गरीब

देशवासियों को ही देती दाद खाज

 

नेता के घर में नींद चैन की

जनता रोये फफक फफक कर

इसे ही तो कहते जन तंत्र में

21 वीं सदी का जंतर मंतर

 

पूछ रही है दुखी जनता आज क्यों इतनी महंगाई है,

अच्छे दिन का झूठा वादा करके क्यों चुप बैठा हरजाई है.

 

अब लड़कियों का महंगा हो गया है प्यार,

क्योंकि गोलगप्पे हो गये है दस के चार.

 

महंगाई का ये आलम है साहब

आजकल लोग याद भी नही करते.

 

महंगाई पर स्लोगन

बच्चे अब छोड़ दिए है रोना,

महंगा इतना हो गया है खिलौना.

 

इस दौर में महंगाई से सब परेशान है,

सरकार को अब गरीबों का कहाँ ध्यान है.

 

दिल उतना नही रोया तन्हाई में,

दिल जितना रो रहा है महंगाई में.

 

ऐसी महँगाई है कि चेहरा भी

बेच के अपना खा गया कोई

अब वो अरमान हैं न वो सपने

सब कबूतर उड़ा गया कोई

कैफ़ी आज़मी

Inflation Quotes in Hindi

गुनाह हमारा सरकार इतना

कि गरीब के जन्मे घर

तुम दिखावे में दे आवाज

बना रहे वो देश सुन्दर

 

नेता हैं देश के बहरे

मीडिया चापलूसी में व्यस्त

इसलिए इस देश में

महंगाई से है जनता त्रस्त

 

टीवी चैनल अखबारों में

शोर बहुत है आजकल

सब राजनीति में बिजी

महंगाई पर बात करेंगे कल

 

हर तरफ है एक शोर

महंगाई कब होगी कम

उपाय नेता तशरीफ़ के नीचे

रखो सूतली बम

 

आलू पूछे प्याज से

बोल इस बार कितना रुलायेगा

प्याज बोला आंसू आने ना दूंगा

गरीब सूंघकर जायेगा

 

बेहाल है महंगाई से

भारत के देखो बाजार

फिर भी गायब मीडिया से खबर

यही है शुभ समाचार

 

कब होंगे कम पेट्रोल डीजल के दाम,

कब सरकार लगाएगी महंगाई पा लगाम.

 

चुनाव में वादा करते है आय बढ़ाएंगे,

और चुनाव के बाद महंगाई बढ़ा देते है.

 

महंगाई से है परेशान,

सबसे ज्यादा किसान.

 

महंगाई इस कदर बढ़ेगी,

तो बिटिया स्कूल में कैसे पढ़ेगी.

 

आप कब तक करेंगे अत्याचार,

हुम् कब तक सहेंगे महंगाई की मार.

 

जब विपक्ष में होते है

तो महंगाई पर बड़ा सवाल उठाते है,

जब सत्ता में आते है,

तो उसका जिम्मेदार विपक्ष को बताते है.

 

बढती हुई “महंगाई” और

घटती हुई “कमाई” को देखकर

मुझे “आधारकार्ड” नही बल्कि

“उधारकार्ड” की जरूरत महसूस हो रही है.

Mehangai Slogan in Hindi

हो रही है महंगाई से

जनता त्रस्त देखो सरकार

लोकतंत्र है या शोषणतंत्र

यही है जी बस समाचार

 

सेब संतरे छोड़े अब

देखकर भले ही आये पानी

महंगाई ने गढ़ दी हाथों पर

गरीबी रेखा की कहानी

 

कोई तो पूछे क्या हाल है

उस गरीब के घर में

खाली पेट ही बदल रहे

महंगाई से करवटें बिस्तर में

 

पेट्रोल में लगी आग

डीजल से उठ रहा धुंआ

अब खरीदारी का यह बाजार

बना जीवन शोषण का कुंआ

 

खतरा अब परदेश से नहीं

नहीं आतंक से जंग

अब तो भूख से आतें ही

खा गई गरीब का अंग अंग

 

मीडिया सरकारी तलवे चाट रही

गरीब पर बैठ नेता खा रहे चाट

सोते रहे ना उठोगे आवाज

वरना खड़ी हो जाएगी खाट

 

क्या आपको पता है कितनी बढ़ रही है महंगाई,

बहुत से लोग कैंसिल कर दे रहे है अपनी सगाई.

 

जनता की आंखों में आंखे डालकर

करीब से पूछो,

महंगाई कैसे जान लेती है

किसी गरीब से पूछो.

 

सरकारें सिर्फ कागजों पर करती है कमाल,

महंगाई ने जीवन को कर डाला है बदहाल.

 

देश की जनता गरीबी से लड़ रही है,

महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है.

 

बाजार में अपार महंगाई छाई,

हो रहा है दिमाग का भेजा फ्राई.

 

आजकल महंगाई जितनी तेजी से बढ़ रही है,

इंसान की कीमत उतनी ही तेजी से घट रही है.

 

एक दौर था जब

संडे हो या मंडे रोज खाते थे अंडे,

एक दौर आज का है

रोज पड़ते है महंगाई के डंडे.

 

हमारे नसीब में कहाँ गर्लफ्रेंड और प्यार है,

सच में मिडिल क्लास महंगाई से बीमार है.

 

जिन्दगी की तन्हाई लिखूँ,

या अपनों की रूसवाई लिखूँ,

बढ़ती हुई महंगाई लिखूँ

या घटती हुई कमाई लिखूँ.

 

अगर इसी रफ़्तार से बढ़ती रहेगी महंगाई,

तो एक दिन कम पड़ने लगेगी ईमानदारी की कमाई.

 

महँगाई की तहलील में जब जिस्म टटोला

मालूम हुआ हम तो कमर भी नहीं रखते

सय्यद ज़मीर जाफ़री

 

ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ

महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है

मुनव्वर राना

 

महंगाई की मार सहते है,

गरीब और क्या कर सकते है,

सरकार बहाने पर बहाने बनाती है,

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